ब्रह्मास्त्र भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 26 टन गोमांस की तस्करी के मामले ने पूरे प्रशासनिक अमले को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। इस मामले के मुख्य आरोपी असलम चमड़ा को पुलिस ने रिमांड पर ले लिया है। उससे यह जानने की कोशिश की कि 260 गायों के बराबर यह मांस आखिर आया कहां से?
इस गिरफ्तारी से ज्यादा चौंकाने वाली कहानी उस रात की है, जब इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ। जब जय भवानी हिंदू संगठन के अध्यक्ष भानू हिंदू और उनकी टीम ने अपनी जान पर खेलकर गोमांस से भरे कंटेनर को रोका। फिर सिस्टम के झूठ से पूरी रात और अगले 20 दिन तक लड़ाई लड़ी।
सीएम के काफिले का बहाना और पुलिस का ड्रामा- जैसे ही ट्रक रुका, भानू ने ड्राइवर से पूछा, इसमें क्या है? ड्राइवर ने आत्मविश्वास से जवाब दिया, बफेलो मीट है। भानू ने कहा, मुझे पक्की खबर है कि इसमें गाय का मांस है। यह सुनते ही ड्राइवर ने कुछ कागजों से भरा एक लिफाफा उनकी ओर बढ़ा दिया।
इसी बीच एक अप्रत्याशित मोड़ आया। उस समय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला वहां से गुजरने वाला था, जिसके कारण सड़क पर भारी पुलिस बल और चेक पॉइंट्स लगे हुए थे। ट्रक रुकते ही पुलिसकर्मी दौड़कर वहां आए।
भानू बताते हैं, पुलिसवालों ने मुझसे कहा कि सीएम साहब का काफिला गुजरने वाला है, जल्दी से यहां से ट्रक हटवाएं, रास्ता जाम मत करो। वे ट्रक को वहां से जल्द से जल्द रवाना करना चाहते थे, लेकिन मैं ट्रक के सामने अड़ा रहा और उसके बम्पर पर लटक गया। मैंने कहा कि जब तक इसकी जांच नहीं होगी, मैं इसे जाने नहीं दूंगा।
अफसर बोले- यह तो बफेलो मीट है, शक कैसे कर सकते हैं- मामला बढ़ता और भीड़ को इकट्ठा होता देख, प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। रात के लगभग 3 बजे, प्रशासन के कहने पर पशु चिकित्सकों की एक टीम को मौके पर बुलाया गया, लेकिन यहां से शुरू हुआ झूठ और मामले को दबाने का असली खेल। भानू के अनुसार, टीम ने आते ही कह दिया कि उनके पास सैंपल लेने के लिए आवश्यक उपकरण और टीम नहीं है। उन्होंने बस दूर से देखकर ही फौरी तौर पर इसे ‘बफेलो मीट’ बता दिया, लेकिन भवानी संगठन के कार्यकर्ता अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका स्पष्ट कहना था कि जब तक मांस का सैंपल लेकर लैब में जांच नहीं हो जाती, वे एक इंच भी नहीं हटेंगे।